किसी शुभ वचन के बोलने पर आखिर क्यों कहा जाता है, मुंह में घी शक्कर | Muh me Ghee shakkar kyo bolte hain

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मुंह में घी शक्कर क्यों बोलते हैं।

अपने बहुत लोगो के मुंह से कहते हुए सुना होगा कि तुम्हारे मुंह में  घी शक्कर तो आपसब के मन में सवाल आता होगा की आखिर,  घी शक्कर का का मतलब क्या होता है, आप चिंता मत करिए, ये वही घी और शक्कर है, जो हमसब खाने में इस्तेमाल करते हैं, तो आखिर कोई भी अच्छी बात कोई बोले तो ये क्यों बोला जाता है, की तुम्हारे मुंह में घी शक्कर, तो आज हम आप सब को बताएंगे की ये घी शक्कर के पीछे का सच, 

सबसे पहले तो, “तुम्हारे मुंह में घी शक्कर यह एक मुहावरा है” और इस मुहावरे का अर्थ है, की तुम्हारी बात सच हो,

आपको ये कोई भी बता देगा की, आपके मुंह में घी शक्कर मुहावरे का अर्थ क्या होता है, लेकिन ये कोई नहीं बताएगा की आखिर घी शक्कर ही क्यों बोला जाता है,

सबसे पहले मैं ये बताता हु की “घी” से क्या क्या फायदे होते हैं, 


घी के फायदे

अगर आपको मानसिक रूप से कोई भी बीमारी है तो, उस बीमारी में घी बहुत लाभदायक है, 

अगर आपके शरीर में किसी भी तरह की कमजोरी है तो, घी आपके शरीर में ताकत लाने का कार्य भी करता है, 

अगर आपको बुखार है, तो आपको बुखार से छुटकारा पाने में भी, घी बहुत ही लाभदायक है, 

अगर आपको T.V. की बीमारी है तो आपको उसमे भी घी बहुत ज्यादा फायदा करता है, और टीवी जैसे बीमारी से लड़ने में मदद करता है,


अब शक्कर के फायदे

अगर आपको पेट से संबंधित कोई भी परेसनी है तो, शक्कर का सेवन बहुत रामबाण साबित होगा, 

अगर आपको भूख नहीं लगती है, तो आपको भूख लगने में भी मदद करेगा शक्कर, 

शक्कर आपके दिमाग के लिए भी बहुत फायदे मंद है, अगर आपको आंख से संबंधित भी कोई समस्या है तो, उसमे भी आप शक्कर का सेवन कर सकते हैं,

चलिए अब ये सारी बाते छोड़ कर अपने Topic पर आते हैं, जानते हैं धी शक्कर का सच,


आज से कई वर्ष पूर्व, एक इंसान था जिसका नाम अशोका था, उसके 2 बच्चे थे, एक लड़का था और एक लड़की थी, लड़के का नाम शोम था, और लड़की का नाम वीना, और उसकी पत्नी भी थी जिसका नाम कल्याणी था, वो लोग बहुत ही हसी खुशी के साथ रहा करते थे, अपने छोटे से परिवार के साथ, एक दिन पैसों की कमी के वजह से उसे अपना घर किसी और को देना परा, तो अब न उसके पास रहने के लिए घर थी ना खाने के लिए कुछ खाना, तो वो लोग जंगल चले गए और वहां जंगलों में अपना एक छोटा सा कुटिया बना कर रहने लगे, अब वो लोग जंगलों में रहते रहते वहां भी अपना एक प्यारा सा घर बना लिए, और करीब 2 साल हो गए,


उनको जंगलों में रहते रहते, अब तो वहां के जानवर भी इन सब को दोस्त बन गए, अशोका जंगलों में लकड़ी कटके घर के चूल्हा को जलाने के लिए वहां सूखी – सुखी लकड़ियां लता था, और जब वो लकड़ियां लता था तो वहां से ही कुछ खाने के लिए ले आता था, और जंगलों में बहुत सारे फल रहते थे, जिसको की अशोक तोड़ कर उसे बाहर गांव में बेच आता था, उससे जो पैसे होते थे उससे ही घर के लिए दाल चावल, बच्चों के लिए किताबें, और घर के जरूरी सामान को लता था, और एक दिन की बात है जब वो फल तोड़ रहा था, तो उसे एक बाबा मिले, तो उस बाबा को अशोका ने प्रमाण किए और बोले बाबा आप इतनी घनी जंगलों में क्या कर रहे हैं, उस बाबा का नाम आनंद ऋषि था,

और आप कहां से आए हैं, तो बाबा ने कहा की मैं पहाड़ों से आया हूं, और तुम इतनी घनी जंगल में क्या कर करे हो, तो अशोका ने कहा बाबा मैं यही जंगलों में रहता हूं, अपने परिवार के सात, फिर बाबा ने कहा तुम्हें पता नहीं की जंगलों में बड़े बड़े जानवर रहते हैं, तो अशोका ने कहा जी प्रभु पता है, लेकिन इतने दिनों से इन जानवरों के साथ रहते रहते ये जानवर भी हमारे मित्र बन गए हैं, और प्रभु अगर मैं किसी जानवर का अहित नहीं करूंगा तो वो लोग मेरा क्यों कुछ बुरा करेंग,


तो आनंद बाबा ने कहा बालक तुम बहुत समझदार व्यक्ति हो, लेकिन तुम जंगलों में क्यों रहते हो, तो अशोका ने कहा बाबा मुझे अपने गांव में रहने के लिए घर नहीं था, और न खाने के लिए कुछ था, तो इसलिए मैं जंगल में रहनें आ गया, तो आनंद बाबा ने कहा की, मुझे बहुत भूख लगी है, क्या तुम्हारे घर पर कुछ खाने को मिल सकता है, तो अशोका ने कहा हां प्रभु, मेरी तो खुशकिस्मती होगी, चलिए प्रभु, तो आनंद बाबा गए उसके साथ, जब घर पहुंचे तो अशोका की पत्नी और उसके बच्चों ने बाबा जी को प्रणाम किया तो अशोका ने बताया कि ये बहुत ही ज्ञानी बाबा है इनका नाम आनंद ऋषि है, फिर बाबा जी ने सब को आशीर्वाद दिया,


अशोका बोले प्रभु बैठिये मैं आपके पैर धुला देता हूं, तो अशोका ने बाबा जी के पैर भुलाए, उसके बाद बाबा जी को बिठाया, और जब अशोका घर के अंदर रसोई घर गया तो पता चला की घर में खाने के लिए कुछ नहीं, है बस थोड़ा सा घी बचा हुआ है, और थोड़ा सा शक्कर है, फिर अशोका की पत्नी परेशान हो गई, की बाबा जी को क्या खिलाएं, जब कुछ नहीं समझ में आया तो आखिर में वही बचा हुआ घी और शक्कर बाबा जी के पास ले के गए, और बोले प्रभु घर में खाने के लिए कुछ बचा ही नहीं था, बस ये थोड़ी से धी और ये बस थोड़ा सा शक्कर ही बचा हुआ था।


तब बाबा जी मुस्कुराते हुए बोले कि बेटा तुम चिंता मत करो, हमें अगर प्यार से एक दान भी मिल जायेगा तो उसमे ही हमारा पेट भर जाएगा, तो अशोका ने वो घी और शक्कर बाबा जी को दिए, बाबा जी वो खा के बोले मेरा पेट भर गया, आज मैं बहुत खुश ही इतने प्यार से भोजन करके, तो फिर बाबा जी बोले अब मैं चलता हूं, तो अशोका ने और सभी घर के लोगों ने बाबा जी को प्रणाम किया, तो बाबा जी सब को आर्शीवाद देते हुए अशोका को बोले जाओ, बच्चा तुम बहुत जल्द बहुत बड़े आदमी बनोगे और तब तुम्हे जंगलों में नहीं रहना परेगा, ये बोल के बाबा जी चले गए,


तो फिर अगले दिन अशोक लकड़ी कटने गया, और जैसे पेड़ पर चढ़कर सुखी लकड़ी काट रहा था तो, उसे ऊपर से थोड़ी दूर में कुछ चमकता हुआ दिखा, वो झट से नीचे आया और देखा तो वो सोने का सिक्का था, फिर उसने सोचा ये सिक्का यहां आए कैसे, तो वो थोड़ा दूर आगे गया तो उसे एक गुफा मिली बहुत पुरानी वो उसके अंदर गया, वहा बहुत सारे कीड़े मकोड़े, शाप ये सब ये, और वो जैस थोड़ा और अंदर गया तो उसे एक गड्ढा मिला और जब उसने उस गड्ढे में देखा तो वो हैरान हो गया,


आपको पता है गड्ढे में क्या था, उसमे बड़ा सा संदूक था, उसने वो संदूक किसी तरह निकाला क्योंकि संदूक बहुत भरी था, वो किसी तरह उसे घर तक ले गया, और जब उसने उस संदूक को खोला तो वो और भी ज्यादा हैरान हो गया, और उसकी पत्नी भी हैरान हो गई, उस संदूक में बहुत सारे हीरे जवाहरात और सोने के सिक्के थे, और तब उसको आनंद बाबा की कही हुई बात याद आई , तो उसने अपनी पत्नी से कहा कल्याणी तुम्हे याद है कल आनंद बाबा क्या बोले थे, तो उसने कहा हां मुझे याद है, और उसने कहा आनंद बाबा धन्य हैं, फिर अशोका बोले हमने तो उन्हे बस घी और शक्कर ही खिलाए था, और उनकी बात सच हो गई,  और उन्होंने हमे इतना बड़ा आशीर्वाद दे दिया, और बोले आज हमे पता चल गया धी और शक्कर बहुत ही शुभ है, फिर वो लोग जंगलों से बाहर चले गए और वो लोग बहुत धनी बन गए और पूरे खूसी से और शान से रहने लगे, 

तो उसी दिन से ये हो गया की अगर कोई व्यक्ति कोई अच्छी बात बोलता है तो लोग उसे कहते हैं, की तुम्हारे मुंह में घी शक्कर, यानी तुम्हारी बात सच हो, 

 

वैसे इस घटना के समर्थन में कोई प्रमाण मौजूद नहीं हैं, तथापि मैंने इस घटना के बारे में बुजुर्गों से सूना था, इसलिए आपलोगों के साथ शेयर कर रहा हूं, 

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