Real story of two best friends

Real story of two best friends in Hindi, यादों के झरोखों से

नमस्कार दोस्तों मैं Gyan Ranjan अपने इस blog post में एक ऐसी love story शेयर करने जा रहा हूँ जो real sensational और heart touching है। यह कहानी पूरी तरह काव्यरुप में है।दो दोस्तों के बीच की यह कहानी आपको अपने जीवन के किसी बीते पल की याद दिला देगा। तो आइये शुरू करते हैं।

तन्हाइयों के आलम में,
खो गया मैं कुछ इस कदर,
न जाने कब मेरे चारों तरफ,
मंडराने लगा यादों का बबंडर।
            
            उन यादों के झरोखों से,
            एक चेहरा देखा मुस्कुराता हुआ,
            अपनी ही धुन में खोया,
            हर समय कुछ गुनगुनाता हुआ।

दोस्तों संग बातें करता,
अनचाही मुलाकातें करता,
नए-नए सपने बुनता,
सपनों की बातें अपनों से करता।
             
             अब अपनों को ,
             कैसे कहें अपना,
             अपनों ने ही तोड़ दिया वह,
             जो हमने देखा था सपना।

वादा किया था मिलकर,
साथ चलेंगे जीवन-पथ पर,
चाहे हो राह में,
कितने भी कांटे और कंकड़।
              
            पर सच ही कहा है किसीने,
            वादे तो किये जाते हैं तोड़ने के लिए,
            कोई-कोई कुछ समय साथ देता है बस,
            राह में अकेला छोड़ने के लिए।

पर यह क्या, एक बार फिर,
उसने थामा मेरा हाथ,
कहा पहले जो हुआ सो हुआ,
अब ना छोड़ूंगा कभी तुम्हारा साथ।
               
               हुए साथ, देखने लगे,
               फिर से नए-नए सपने,
               मिलकर बढे आगे कुछ इस कदर,
               दिखने लगे पुरे होते सारे सपने।

पर यह सपना भी सपना ही निकला,
नींद से जगते ही टूट गया,
वह राह बदल आगे बढ़ गया,
और मैं पीछे छूट गया।
                  
                  चलो जो भी होता है,
                  अच्छा ही होता है,
                  समय ही बताता है कि,
                  कौन झूठा और सच्चा होता है।

अब मैंने भी चुन ली अपनी राहें,
छोड़ दी थामनि किसी की बाहें,
मंजिल दूर, रह मुश्किल, चलना अकेले,
खुद ही झेलने हैं रह के सारे झमेले।
                   
                 बढ़ चला इस कठिन राह पर,
                 गिरते सम्हलते, हर पल कुछ सीखते
                 पर डिगा नहीं,
                 डटा रहा अपनी चाह पर।

मैं जानता हूँ, उसे अब भी है मुझसे प्यार,
बस मेरी कामयाबी का होगा इंतजार,
शायद छोड़ दिया मुझे अकेले इसलिए क्योंकि,
मेरी काबिलियत पर था उसे एतबार।
                 
              अब तो मंजिल भी नजर आने लगी,
              मेरी मेहनत अब रंग लाने लगी,
              दिन दूर नहीं जब मुझे मिलेगा मुकाम,
              जो बढ़ाएगा मेरा सम्मान।

तब पुरे होंगे मेरे सारे सपने,
जब अपने तो अपने,
पराये भी कहेंगे,
हम तो सदा से हैं तुम्हारे अपने।
                
                न जाने कैसे इस तन्हाई में,
                मुझे पुरानी यादों ने झकझोर दिया,
                मंजिल के करीब पहुँच पीछे देखा,
                कैसे मैंने राह को नया मोड़ दिया।

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